Thursday, March 19, 2009

कल्पना के अम्बर,
भावना के सागर,
कुछ बूँदें,
थोड़े ओस,
मिला दी है मैंने,
तो देखो,
मेरे शब्दों के,
कोई छोर नहीं,
किसी ओर नहीं.