Tuesday, June 26, 2012


चलते चलते नन्हे मुन्हे  पैर मेरे
थक जाते हैं, देखो न नानी माँ
मासी जब बुलाती है तो, भाग भाग के,
नहीं आने में मज़ा भी आता है ना,
पापा ने कहा नहीं की याद करते हैं
तो इतने मायूस से क्यों हैं माँ
नानाजी जब जाते हैं दफ्तर
हलचल मेरा मन होता है ज़रा
मैंने दूध का गिलास पटक दिया आज
मुझे कहीं डांटोगी तो नहीं ना
मैंने छुप के मिटटी खायी थी सुबह
गुस्सेवाली मासी ने देखा था क्या?




Sunday, June 17, 2012


शबाब भी हो और शराब भी हो,
होश-ओ -हवास, न हो तो  न हो,

रहेगी कब तलक सादगी में कैद हसरतें,
कभी तो हम गिरें, कभी आवाज़ भी हो,

न करते शोर शराबा तो और क्या करते,
मेरे घर में कभी, शाम कुछ ख़ास तो हो ।