Sunday, June 17, 2012


शबाब भी हो और शराब भी हो,
होश-ओ -हवास, न हो तो  न हो,

रहेगी कब तलक सादगी में कैद हसरतें,
कभी तो हम गिरें, कभी आवाज़ भी हो,

न करते शोर शराबा तो और क्या करते,
मेरे घर में कभी, शाम कुछ ख़ास तो हो ।





2 Comments:

Blogger Prateek said...

Bahut khoob!

21/9/13 17:35  
Blogger someone said...

awsome.

23/7/16 10:31  

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